ई-नामांकन - पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव


चर्चा में क्यों ?
  • पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में ईमेल से किए नामांकन को स्वीकार करने के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोक लगा दी।

  • पंचायत चुनाव की जिन 34 फीसद सीटों पर सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, उन प्रत्याशियों की जीत की घोषणा व प्रमाण पत्र देने से सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को रोक दिया है।

सुप्रीम कोर्ट
  • चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 34 फीसद निर्विरोध निर्वाचित सीटों पर जीत की अधिसूचना जारी नहीं करें।

  • विपक्षी दलों द्वारा मतदान की तिथि पढ़ाने को लेकर की गई मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया।

  • यानी राज्य की 66 फीसद सीटों पर आगामी 14 मई को चुनाव हो सकता है।

  • हालांकि, 34 फीसद सीटों में से कई पर निर्विरोध निर्वाचित सदस्यों को जीत का प्रणाम पत्र दे दिए गए हैं । उनका क्या होगा, इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई जिलों में जीत का प्रमाण पत्र आयोग की ओर से बहुत पहले ही दे दिया गया है।

  • कलकत्ता हाई कोर्ट के यह कहने के बाद कि राज्य चुनाव आयोग कभी भी चुनाव करा सकता है, राज्य में 14 मई को मतदान की घोषणा कर दी गई।

  • 17 मई को सुबह आठ बजे से मतगणना होगी।

  • वहीं, कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने भी साफ कर दिया कि निर्बाध व शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए किए गए सुरक्षा बंदोबस्त से संतुष्ट होने पर राज्य चुनाव आयोग किसी भी दिन मतदान करा सकता है। इसमें कोर्ट कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।

  • चुनाव आयोग के कानून में ई नामांकन नहीं : मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षा वाली पीठ ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग के कानून अनुसार चुनावी प्रक्रिया चलनी चाहिए।

  • चुनाव आयोग के कानून में ई नामांकन का कोई उल्लेख नहीं है।

  • भाजपा के वकील ने कहा कि 34 फीसद सीटों पर सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।

  • इसीलिए अदालत को इस मामले पर गौर करना चाहिए।

  • इस पर न्यायाधीश ने आश्चर्य करते हुए आयोग के अधिवक्ता से सवाल किया कि कितनी सीटों पर प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

  • आयोग की ओर से कहा गया कि 17000 सीटों पर।

  • वहीं माकपा व भाजपा के वकीलों ने कहा 22 हजार सीटों पर निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं

  • कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव के दौरान यदि ¨हसा या अशांति होती है तो उसका दायित्व राज्य के उन प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों पर होगा जिन्होंने मतदान की सुरक्षा की रिपोर्ट अदालत को सौंपी है।

  • यदि 2013 पंचायत चुनाव से अधिक ¨हसा हुई और जानमाल का नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई रिपोर्ट सौंपने वाले अधिकारी अपनी जेब से करेंगे।

  • उनके वेतन से भी भरपाई नहीं हुई तो उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी। उससे भी क्षतिपूर्ति नहीं हुई तो राज्य सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी।

#ElectoralReforms #enomination

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