आधार कानून की वैधानिकता पर सुनवाई


मुद्दा
  • सेवानिवृत्त जज पुत्तासामी और कई अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आधार कानून की वैधानिकता को चुनौती दी है।

  • याचिकाओं में विशेष तौर पर आधार के लिए एकत्र किए जाने वाले बायोमीटिक डाटा से निजता के अधिकार के हनन की दलील दी गई है।

  • इसी दौरान कोर्ट में निजता के अधिकार के मौलिक अधिकार होने का मुद्दा उठा था। इसके बाद संविधान पीठ ने आधार की सुनवाई बीच में रोक कर निजता के मौलिक अधिकार पर सुनवाई की और निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया।

  • इसके बाद पांच जजों ने आधार की वैधानिकता पर सुनवाई शुरू की थी।

केशवानंद भारती मामला
  • केशवानंद भारती मामला भारत के न्यायिक इतिहास में सबसे चर्चित मुकदमों में एक है।

  • इस मामले में अब तक की सबसे लंबी सुनवाई हुई है।

  • इसमें सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा 68 दिनों तक बहस चली।

  • इसकी सुनवाई 31 अक्टूबर, 1972 को शुरू होकर 23 मार्च, 1973 तक चली थी।

  • 24 अप्रैल, 1973 को चीफ जस्टिस एसएम सीकरी और 12 अन्य न्यायाधीशों ने निर्णय दिया।

  • अदालत ने कहा था कि संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान के मूल ढांचे को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट
  • सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून की वैधानिकता पर सुनवाई पूरी करके गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

  • मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने इस पर साढ़े चार महीने सुनवाई की।

  • यह सुप्रीम कोर्ट में अब तक की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है।

  • अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, सबसे लंबा चलने वाला यह दूसरा मामला है, जिसमें उन्होंने बहस की।

  • पहला मामला केशवानंद भारती का था।

  • कुल साढ़े चार माह में 38 दिनों तक आधार पर सुनवाई हुई।

  • नियमित सुनवाई सिर्फ मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होती है। सोमवार और शुक्रवार नए मामलों की सुनवाई के दिन तय हैं। इसलिए उन दिनों नियमित सुनवाई कर रही पीठ नहीं बैठती।

  • आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान, अरविंद दत्तार, गोपाल सुब्रमण्यम, पी चिदंबरम, केवी विश्वनाथन सहित आधा दर्जन से ज्यादा लोगों ने बहस की।

  • उन्होंने आधार को निजता के अधिकार का हनन बताया।

  • याचिकाकर्ताओं का कहना था कि डेटा की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

  • इसके अलावा बायोमीटिक पहचान एकत्र करके हर व्यक्ति को 12 अंकों की संख्या में तब्दील किया जा रहा है।

  • याचिकाकर्ताओं ने आधार कानून को मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसे रद करने की मांग की है।

  • यह भी आरोप लगाया है कि सरकार ने हर सुविधा से आधार को जोड़ दिया है, जिसके कारण गरीब लोग आधार का डेटा मिलान नहीं होने के कारण सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं।

  • दूसरी ओर केंद्र सरकार, यूएआइडी, गुजरात और महाराष्ट्र सरकार सहित कई संस्थाओं ने आधार कानून को सही ठहराते हुए याचिकाओं को खारिज करने की अपील की।

  • सरकार की ओर से मुख्य बहस अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने की।

  • वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार आधार कानून को इसलिए लाई है, ताकि सुविधाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंचे।

  • सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पीपीटी प्रेजेंटेशन के जरिये यह भी साबित करने की कोशिश की कि लोगों का डेटा सरकार के पास चाक चौबंद व्यवस्था में सुरक्षित है।

  • उसके लीक होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

  • डेटा लीक होने के बारे में कानून बनाने और डेटा को सुरक्षित रखने के उपाय पर विचार हो रहा है।

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